1839 में फ्रांसीसी आविष्कारक लुई दागुएरे ने दागुएरियोटाइप प्रक्रिया का अनावरण किया, जो दुनिया की पहली व्यावहारिक फोटोग्राफी तकनीक थी। उनकी खोज तब हुई जब उन्होंने एक रासायनिक अलमारी में पारे (मरकरी) के वाष्प के प्रभाव को देखा। उन्होंने पाया कि आयोडीन से उपचारित चांदी के लेप वाली तांबे की प्लेट पर पारे के वाष्प के संपर्क से पहले से खींची गई छुपी तस्वीर दिखाई देने लगती है। इस प्रक्रिया ने फोटोग्राफी को अस्थिर विज्ञान से इतिहास दर्ज करने के शक्तिशाली औजार में बदल दिया। पहले की फोटोग्राफी में घंटों लगते थे, लेकिन दागुएरियोटाइप से मिनटों में स्पष्ट तस्वीरें आ सकती थीं। इसके चलते दागुएरे को फ्रांस सरकार से आजीवन पेंशन मिली और फोटोग्राफी का युग शुरू हुआ। आज भी उनके द्वारा ली गई तस्वीरें दुनिया भर के संग्रहालयों में देखी जा सकती हैं।
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