भारत की सबसे लंबी भूमिगत जल सुरंग परियोजना स्लीमनाबाद टनल ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट ने 18 साल बाद नर्मदा के पानी को सोन बेसिन से जोड़ने का काम पूरा किया है। यह सुरंग मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। परियोजना से करीब 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। इसका लाभ राज्य के छह जिलों के किसानों को मिलेगा। सुरंग के निर्माण में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लागत बढ़ने के बावजूद परियोजना को पूरा किया गया। यह जल परिवहन गुरुत्वाकर्षण आधारित प्रणाली से किया जाएगा। इससे सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बेहतर होगी। किसानों को खेती के लिए अधिक भरोसेमंद जल स्रोत मिल सकेगा। यह परियोजना देश के बड़े जल प्रबंधन और सिंचाई अभियानों में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। स्लीमनाबाद टनल को भारत की आधुनिक इंजीनियरिंग क्षमता का उदाहरण बताया जा रहा है।
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