सुप्रीम कोर्ट ने सबवेंशन लोन स्कीम (subvention loan schemes) में फंसे होमबॉयर्स को बड़ी राहत देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। न्यायालय ने केंद्र सरकार से इस मामले में जवाब तलब किया है कि बिल्डरों और उधारदाताओं (बैंकों) के बीच परियोजनाओं में देरी होने पर वित्तीय बोझ साझा करने के लिए क्या कोई नीति बनाई जा सकती है। कोर्ट ने एक होमबॉयर की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह चिंता व्यक्त की कि ग्राहकों को घर का कब्जा मिले बिना ही भारी ईएमआई और लोन चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कोर्ट ने बैंकों को किसी भी प्रकार की दंडात्मक या बलपूर्वक कार्रवाई करने से रोकने का निर्देश दिया है और लोन वितरण प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और सख्त निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया है। यह मामला रियल एस्टेट क्षेत्र में होमबॉयर्स के अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें वित्तीय शोषण से बचाने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
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