हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए नई रणनीति अपना रहा है। देश अब केवल खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय तेल आयात के स्रोतों में विविधता ला रहा है। भारत ने रूस से कच्चे तेल की रिकॉर्ड स्तर पर खरीद बढ़ाई है। इसके अलावा ब्राजील और वेनेजुएला से भी तेल आयात में वृद्धि की गई है। इस कदम से संभावित आपूर्ति बाधाओं के प्रभाव को कम करने में मदद मिली है। खाड़ी क्षेत्र अब भी भारत की ऊर्जा जरूरतों का प्रमुख स्रोत बना हुआ है। हालांकि मौजूदा भू-राजनीतिक संकट ने वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों और साझेदारों की तलाश को तेज कर दिया है। सरकार और तेल कंपनियां पर्याप्त भंडार बनाए रखने पर भी ध्यान दे रही हैं। बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि विविधीकृत आयात नीति भारत को जोखिम कम करने में मदद करेगी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर भी सीमित हो सकता है। भारत स्वच्छ ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधनों पर भी निवेश बढ़ा रहा है। मौजूदा परिस्थितियों में तेल आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना देश की आर्थिक जरूरतों के लिए अहम माना जा रहा है।
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