मध्य पूर्व में बढ़ती अशांति और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में संकट के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा कूटनीतिक और व्यापारिक कदम उठाया है। भारत और ओमान के बीच नया मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 1 जून से लागू हो गया है। यह समझौता भारत के लिए एक सामरिक विकल्प (प्लान बी) के रूप में काम करेगा। हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, लेकिन वहां अस्थिरता के चलते भारत को जोखिम का सामना करना पड़ रहा था। ओमान की भौगोलिक स्थिति हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर है, जो इसे एक भरोसेमंद और सुरक्षित प्रवेश द्वार बनाती है। इस समझौते के तहत भारत ओमान के रास्ते व्यापार और ऊर्जा आयात को सुनिश्चित कर सकेगा। हाल के महीनों में ओमान से भारत के आयात में तेजी से वृद्धि देखी गई है, जो इस रणनीति की उपयोगिता को साबित करती है। यह समझौता भारत को तेल आयात में विविधता लाने का अवसर देगा। साथ ही, ओमान के माध्यम से भारत मध्य पूर्व और अफ्रीका के बाजारों में भी अपनी पहुंच बढ़ा सकता है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए टैरिफ में कमी और व्यापार बाधाओं को हटाने पर सहमति बनी है। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है। सरकार का मानना है कि ओमान के साथ यह गठजोड़ भू-राजनीतिक झटकों से निपटने में मददगार होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता भारत को हॉर्मुज संकट के प्रभावों को कम करने में सक्षम बनाएगा। आने वाले समय में भारत-ओमान व्यापार संबंध और मजबूत होंगे। यह पहल भारत की सक्रिय विदेश नीति और आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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