हाईकोर्ट ने हिरासत में लोगों की पिटाई और महिलाओं से छेड़छाड़ को गंभीर अपराध बताया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी हरकतें पुलिस की आधिकारिक ड्यूटी का हिस्सा नहीं हैं। पुलिस हिरासत में किसी व्यक्ति के साथ मारपीट करना कानून के दायरे में अपराध हो सकता है। महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार या छेड़छाड़ को भी किसी आधिकारिक जिम्मेदारी के नाम पर उचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने पुलिसकर्मियों की जवाबदेही पर जोर दिया। फैसले में कानून के शासन और नागरिकों के अधिकारों के महत्व को रेखांकित किया गया। हिरासत में लिए गए लोगों के साथ निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार व्यवहार किया जाना चाहिए। पुलिस अधिकारियों को अपने अधिकारों का इस्तेमाल कानून के अनुसार करना होता है। अदालत ने ड्यूटी के नाम पर कथित दुर्व्यवहार को स्वीकार करने से इनकार किया। इस टिप्पणी का उद्देश्य पुलिस हिरासत में अधिकारों के उल्लंघन को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट करना है। मामले में अदालत ने पुलिस कर्तव्यों और आपराधिक आचरण के बीच अंतर को रेखांकित किया है।
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