हरियाणा के गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली निजीकरण के विरोध में रोडवेज सांझा मोर्चा के कर्मचारियों ने शुक्रवार को बस स्टैंड पर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने दोनों जिलों की बिजली व्यवस्था निजी कंपनी को सौंपने के फैसले का विरोध किया और बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को समर्थन दिया। उन्होंने सरकार से निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन करीब दो घंटे तक चला, जिसके बाद कर्मचारियों ने जीएम अजय दलाल को अपनी मांगों और 5-6 नवंबर को प्रस्तावित राज्यव्यापी हड़ताल को लेकर ज्ञापन सौंपा। मोर्चा का कहना है कि सरकार और परिवहन मंत्री की ओर से मांगों पर सहमति बनने के बावजूद उन्हें पूरा नहीं किया गया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो दोनों दिन बसों का चक्का जाम किया जाएगा। प्रदर्शन में सेवानिवृत्त रोडवेज कर्मचारी और अधिकारी भी शामिल हुए। रिटायर्ड इंस्पेक्टर आत्माराम सहारण ने आरोप लगाया कि परिवहन मंत्री ने 8 अगस्त को बातचीत के दौरान एक सप्ताह में मांगों पर पत्र जारी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने आशंका जताई कि सरकार बिजली के साथ रोडवेज को भी निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। मोर्चा ने बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण पर रोक लगाने, 262 निजी बसों के परमिट की नीति रद्द करने तथा बसों और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग की। राज्य महासचिव चम्मन लाल स्वामी ने कहा कि रोडवेज कर्मचारियों को ओवरटाइम और एलटीसी के लिए पर्याप्त बजट नहीं मिल रहा है। मोर्चा ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी नहीं होने पर राज्य कमेटी के आह्वान पर 5 और 6 नवंबर को हड़ताल की जाएगी।
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