राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की सीमा को दिल्ली से 100 किलोमीटर के दायरे में सीमित करने का प्रस्ताव हरियाणा के विकास के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो राज्य का लगभग 60% क्षेत्र एनसीआर से बाहर हो सकता है। वर्तमान में हरियाणा के 14 जिले एनसीआर का हिस्सा हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल 25,327 वर्ग किलोमीटर है, जो घटकर 10,546 वर्ग किलोमीटर रह सकता है। इस बदलाव से महेंद्रगढ़, जींद, करनाल और पानीपत जैसे जिले सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रियल एस्टेट और औद्योगिक निवेश की गति पर शुरुआती असर पड़ सकता है, क्योंकि ‘एनसीआर टैग’ की ब्रांड वैल्यू निवेश आकर्षित करने में बड़ी भूमिका निभाती है। हालांकि, राज्य सरकार को एनसीआर के कड़े नियमों से मुक्ति मिलेगी और वह स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार बेहतर विकास योजनाएं लागू कर सकेगी। सरकार ने 11 राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ एक-एक किलोमीटर का कॉरिडोर बनाए रखने का प्रस्ताव दिया है, ताकि कनेक्टिविटी बनी रहे। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का भी मानना है कि दूरस्थ जिलों को एनसीआर में रहने के नुकसान अधिक और लाभ कम मिल रहे थे। भविष्य में राज्य को इन जिलों के लिए स्वतंत्र औद्योगिक और इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल तैयार करने होंगे। यह निर्णय राज्य की भविष्य की शहरी नियोजन रणनीति और आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ होगा।
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