हरियाणा सरकार ने राज्य के विभिन्न बोर्ड, निगम, आयोग और समितियों में नियुक्त गैर-सरकारी चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के लिए बड़ी सौगात दी है। अब इन पदाधिकारियों को मानदेय के रूप में 75 हज़ार रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। यह पहली बार है जब राज्य सरकार ने इतनी अधिक राशि और अतिरिक्त सुविधाओं की घोषणा की है। इससे पहले इन पदों पर बैठे लोगों को बहुत कम मानदेय मिलता था। नए निर्णय के तहत चेयरमैन और वाइस चेयरमैन को सरकारी गाड़ी और निजी ड्राइवर की भी सुविधा प्रदान की जाएगी। साथ ही, उनके कार्यालय के लिए अलग से भत्ते और अन्य खर्चों की भी व्यवस्था की गई है। सरकार का तर्क है कि इससे पदाधिकारी बेहतर ढंग से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे। यह कदम उन लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए उठाया गया है जो बिना राजनीतिक स्वार्थ के सार्वजनिक सेवा में जुटे हैं। हालांकि, विपक्ष ने इस फैसले को सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ बताते हुए आलोचना की है। विपक्ष का कहना है कि पहले से ही महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे राज्य में यह फिजूलखर्ची है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस निर्णय से लगभग 100 से अधिक पदाधिकारी लाभान्वित होंगे। इन सुविधाओं पर सालाना कई करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। नायब सिंह सैनी सरकार ने इसे अपनी सार्वजनिक सेवा नीति का हिस्सा बताया है। अब देखना यह है कि क्या इस फैसले से कामकाज में गुणात्मक सुधार आता है या यह महज एक राजनीतिक दांव साबित होता है। फिलहाल, सरकार ने इस आशय का आदेश जारी कर दिया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
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