पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के करीब 20 साल से पढ़ा रहे 12,700 गेस्ट टीचरों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सरकार को 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत दो महीने के भीतर इन शिक्षकों की सेवाएं नियमित करने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि गेस्ट टीचरों की नियुक्ति कोई बैकडोर एंट्री नहीं थी, बल्कि विज्ञापन, मेरिट और चयन प्रक्रिया के बाद हुई थी। सरकार ने खुद माना था कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी थी। कोर्ट ने कहा कि 20 साल तक सेवाएं लेने के बाद उन्हें अस्थायी नहीं कहा जा सकता। शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए अदालत ने सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि वे केवल स्टॉप-गैप व्यवस्था थे। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के मदन सिंह मामले के अनुरूप है। गेस्ट टीचर संगठन ने इसे सम्मान की जीत बताया है। अब सरकार को इन शिक्षकों को रिटायरमेंट और नौकरी के सभी लाभ देने होंगे।
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