हरियाणा के सबसे बुजुर्ग पूर्व विधायक और हिंदी आंदोलन के सत्याग्रही रहे सहीराम धारणिया (104 वर्ष) को मरणोपरांत ‘बिश्नोई रत्न’ सम्मान देने की घोषणा की गई है। वे इस सम्मान को पाने वाले बिश्नोई समाज के देश में चौथे व्यक्ति होंगे। इससे पहले यह सम्मान पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल, पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई और राजस्थान के भागीरथ बिश्नोई को मिल चुका है। अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा द्वारा 29 मई को उनकी शोक सभा के दौरान यह सम्मान उनके पैतृक गांव में प्रदान किया जाएगा। सहीराम धारणिया वर्ष 1957 में अबोहर से जनसंघ के टिकट पर विधायक बने थे और समाज के पहले विधायक माने जाते हैं। उन्होंने लंबे समय तक सामाजिक कार्यों में योगदान दिया और बिश्नोई महासभा में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उनके निधन के बाद परिवार और समाज में राजकीय सम्मान न दिए जाने को लेकर नाराजगी व्यक्त की गई है। परिवार का कहना है कि उनके योगदान के बावजूद उन्हें जीवित रहते या निधन के बाद सरकारी स्तर पर उचित सम्मान नहीं मिला। वे बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आकर हरियाणा में बसे थे और सादा जीवन जीते हुए समाज सेवा में सक्रिय रहे। उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने शोक व्यक्त किया है।
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