
हमीद दाभोलकर ने महाराष्ट्र सरकार के कदमों को एक सकारात्मक संकेत माना, यह कहते हुए कि "इरादा अच्छा है, पर आगे और काम करना बाकी है"। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि न्यायपालिका और प्रशासनिक संस्थाएँ जब मिलकर काम करती हैं, तो समाज में भरोसा और सुरक्षा का माहौल बनता है। आशोक खरात की गिरफ्तारी ने कई सवाल उठाए, पर दाभोलकर ने इसे सुधार की संभावनाओं के रूप में देखा, जहाँ नागरिकों और सरकार के बीच संवाद को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने सभी पक्षों को मिलकर एक सशक्त, पारदर्शी और लोगों के हित में नीतियां बनाने का आह्वान किया, जिससे राज्य में लोकतांत्रिक मूल्यों की नई ऊर्जा बह सके। इस सकारात्मक दृष्टिकोण से उम्मीद है कि महाराष्ट्र जल्द ही न्याय, सुरक्षा और विकास के क्षेत्रों में प्रेरणादायक बदलाव लाएगा।