आज कई लोग स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए डॉक्टर की बजाय सोशल मीडिया और पॉडकास्ट का सहारा ले रहे हैं। इन प्लेटफॉर्मों पर सलाह देने वाले कई इन्फ्लुएंसर्स के पास चिकित्सा की मान्यता प्राप्त योग्यता नहीं होती। फिर भी उनकी सामग्री बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचती है। सुविधा और आसान भाषा के कारण लोग इन पर तेजी से भरोसा करने लगे हैं। वैश्विक अध्ययनों में पाया गया है कि कई हेल्थ इन्फ्लुएंसर्स स्वास्थ्य जांच के लाभ तो बताते हैं, लेकिन उसके जोखिम और सीमाओं का उल्लेख नहीं करते। इससे लोगों को अधूरी और भ्रामक जानकारी मिल सकती है। सोशल मीडिया के एल्गोरिदम भावनात्मक और ज्यादा प्रतिक्रिया पाने वाली सामग्री को अधिक बढ़ावा देते हैं। इसी वजह से गलत स्वास्थ्य संबंधी दावे तेजी से फैलते हैं। सही और वैज्ञानिक जानकारी कई बार पीछे छूट जाती है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित मॉडल भी कई बार नकली और वास्तविक चिकित्सा सलाह में अंतर करने में चूक जाते हैं। इससे गलत जानकारी और अधिक फैलने का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी निर्णय हमेशा योग्य डॉक्टर की सलाह से ही लेने चाहिए। सोशल मीडिया और AI को केवल प्रारंभिक जानकारी का स्रोत माना जाना चाहिए। विश्वसनीय चिकित्सा संस्थानों और विशेषज्ञों की सलाह पर भरोसा करना सबसे सुरक्षित विकल्प है।
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