सुकमा जिला जेल में हाल ही में जिला स्तरीय जेल निरीक्षण समिति द्वारा एक विशेष निरीक्षण किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी नाबालिग विचाराधीन बंदी को वयस्क कैदियों के साथ जेल में न रखा जाए। निरीक्षण के दौरान समिति ने बंदियों से उनकी आयु और दस्तावेजों के संबंध में विस्तृत बातचीत की और उनके रिकॉर्ड का सत्यापन किया। इस प्रक्रिया में एक विचाराधीन बंदी को प्रथम दृष्टया चिन्हांकित किया गया है, जिसकी आयु के दस्तावेजों की गहराई से जांच की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के तहत, यदि कोई बंदी नाबालिग पाया जाता है, तो उसे तत्काल बाल संप्रेक्षण गृह में स्थानांतरित किया जाना अनिवार्य है। समिति के अध्यक्ष अधिवक्ता कैलाश जैन, जिला बाल संरक्षण अधिकारी जितेंद्र सिंह बघेल और अन्य सदस्यों ने जेल प्रशासन से आवश्यक जानकारी प्राप्त कर बंदियों की स्थिति की समीक्षा की। यह समिति प्रत्येक तिमाही में जिला जेल का निरीक्षण करती है और अपनी रिपोर्ट जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दंतेवाड़ा को सौंपती है। इस कदम का उद्देश्य बच्चों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा करना और जेल प्रशासन में पारदर्शिता बनाए रखना है।
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