यमुना नदी का जलस्तर चिंताजनक रूप से घटकर एक पतली और भूरे रंग की धारा में बदल गया है। कई स्थानों पर नदी इतनी सिकुड़ गई है कि लोग इसके किनारों के बीच पैदल चल सकते हैं। यह स्थिति पर्यावरणीय गिरावट का गंभीर संकेत मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, हरियाणा से सीमित जल आपूर्ति इस समस्या का एक प्रमुख कारण है। इसके अलावा, भीषण गर्मी के कारण पानी का तेजी से वाष्पीकरण हो रहा है। हर वर्ष गर्मियों में यमुना का जलस्तर घटता है, लेकिन इस बार स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है। नदी में पर्याप्त प्रवाह न होने से इसकी पारिस्थितिकी पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। जलजीवों और अन्य जीवों के लिए अनुकूल परिस्थितियां लगातार कम होती जा रही हैं। कम पानी के कारण प्रदूषकों का प्रभाव भी अधिक दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों ने नदी के असामान्य रूप से सिकुड़ने पर चिंता जताई है। पर्यावरणविदों का कहना है कि नदी को बचाने के लिए दीर्घकालिक उपाय जरूरी हैं। जल प्रबंधन और संरक्षण की प्रभावी नीतियों की मांग भी उठ रही है। यमुना की वर्तमान स्थिति जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव की गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।
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