भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के दो मामले बंद कर दिए हैं। इन मामलों में आरोपियों के खिलाफ अभियोजन चलाने की सरकारी मंजूरी नहीं मिली। मंजूरी के अभाव में ACB ने आगे की कानूनी कार्रवाई रोक दी। यह घटनाक्रम भ्रष्टाचार के मामलों में सरकारी स्वीकृति की भूमिका को उजागर करता है। संबंधित मामले पुलिस अधिकारियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े थे। सरकारी मंजूरी नहीं मिलने के कारण इन मामलों में अभियोजन आगे नहीं बढ़ सका। वर्ष 2023 से अब तक ACB भ्रष्टाचार से संबंधित 20 से अधिक प्राथमिकी बंद कर चुका है। इन मामलों के बंद होने से भ्रष्टाचार निरोधक कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठ सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में दोनों मामलों के आरोपों और संबंधित अधिकारियों के नामों का विवरण नहीं दिया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि सरकार ने अभियोजन की मंजूरी देने से इनकार क्यों किया। ACB की कार्रवाई सरकारी स्वीकृति और भ्रष्टाचार के मामलों में जांच एजेंसियों की भूमिका के बीच संबंध को दर्शाती है। मामले बंद होने का अर्थ अपने आप में आरोपों का न्यायिक रूप से गलत साबित होना नहीं है।
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