केंद्र सरकार ने विदेशी फंड से संचालित होने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के लिए कार्यक्षेत्र को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नई गाइडलाइन्स के तहत, इन एनजीओ को यह स्पष्ट करना होगा कि वे किन विशिष्ट क्षेत्रों में काम करेंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विदेशी चंदे का उपयोग किसी भी प्रकार के ‘धर्मांतरण’ (proselytisation) या धार्मिक गतिविधियों के प्रसार के लिए नहीं किया जा सकेगा। सरकार का यह कदम विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता लाने और यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है कि धन का उपयोग केवल उन्हीं सामाजिक और विकास कार्यों में हो, जिनके लिए एनजीओ को पंजीकृत किया गया है। इन नियमों के अनुपालन की कड़ी निगरानी की जाएगी, और यदि कोई एनजीओ निर्धारित क्षेत्रों से बाहर जाकर गतिविधि करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह नीति देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है।
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