सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को वन भूमि पर हुए अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया है। अदालत ने अगस्थ्यमलाई जैव विविधता क्षेत्र से हजारों अतिक्रमणकारियों को हटाने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने को कहा है। सरकार को यह योजना एक महीने के भीतर प्रस्तुत करनी होगी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण और वन क्षेत्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मामले की सुनवाई के दौरान वन भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जों का मुद्दा सामने आया। कोर्ट ने 118 सरकारी कर्मचारियों की पहचान का भी उल्लेख किया, जिन पर वन भूमि अतिक्रमण में शामिल होने के आरोप हैं। अदालत ने इनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों से नियमों के पालन की अपेक्षा अधिक होती है। आदेश का पालन नहीं होने पर प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की चेतावनी भी दी गई है। न्यायालय ने अधिकारियों को कार्रवाई में देरी न करने का निर्देश दिया। यह फैसला पर्यावरण संरक्षण और सरकारी जवाबदेही के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वन क्षेत्रों में अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान को गति मिल सकती है। राज्य सरकार को अब निर्धारित समयसीमा के भीतर अदालत को प्रगति रिपोर्ट भी देनी होगी।
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