रूस ने 30 नवंबर 2026 तक विमानन ईंधन (एविएशन फ्यूल) के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। इस कदम से वैश्विक विमानन उद्योग पर असर पड़ने की आशंका है, खासकर उन देशों में जो रूसी ईंधन पर निर्भर हैं। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में बढ़ोतरी हो सकती है। यूरोपीय संघ और अमेरिका ने चिंता जताई है। रूस का कहना है कि यह अस्थायी उपाय है और उसकी अपनी जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है। इस निर्यात प्रतिबंध के कारण तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है। भारत जैसे देशों पर प्रभाव कम होगा क्योंकि उनके पास वैकल्पिक स्रोत मौजूद हैं। रूस इस बीच घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
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