चीन की मुद्रा के मुकाबले भारतीय रुपये में इस साल गिरावट देखने को मिली है। इसके कारण चीन से आयात होने वाले सामानों की लागत बढ़ गई है। रुपये की कमजोरी का सीधा असर भारत के व्यापार संतुलन पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे आयात महंगा होने के साथ ही कंपनियों की लागत भी बढ़ रही है। वहीं चीन को इस स्थिति का व्यापारिक लाभ मिल रहा है। भारतीय बाजार में चीनी उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि मुद्रा में उतार-चढ़ाव वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित होता है। इससे घरेलू उद्योगों पर भी दबाव बढ़ सकता है। निर्यात और आयात के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौती बन रहा है। सरकार और आर्थिक संस्थान स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले समय में विदेशी व्यापार नीतियों पर इसका असर देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत आर्थिक सुधारों की जरूरत है। निवेश और उत्पादन लागत पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
Source: Source