री-नीट परीक्षा के बाद फर्जीवाड़े से जुड़ा बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें एक संगठित सॉल्वर गैंग का खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि यह गिरोह बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली में सेंध लगाकर असली अभ्यर्थियों की जगह अन्य उम्मीदवारों को परीक्षा में बैठाता था। इस नेटवर्क में मेडिकल और अन्य प्रोफेशनल कोर्स के मेधावी छात्रों को सॉल्वर के रूप में इस्तेमाल किए जाने की जानकारी मिली है। पूरे रैकेट में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन से जुड़ी कुछ एजेंसियों के कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि इस तरह की डील लगभग 60 लाख रुपये तक में की जाती थी। मामले का खुलासा लखीसराय में गैंग के पकड़े जाने और एक गुप्त ईमेल मिलने के बाद हुआ। जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं। परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाकर बड़े पैमाने पर अनियमितता की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों ने कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। इस खुलासे से परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं।
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