कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन के बीच कांग्रेस पार्टी के भीतर कैबिनेट गठन और सामाजिक संतुलन को लेकर गहन मंथन चल रहा है। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद सिद्धारमैया की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सिद्धारमैया के त्याग की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की है। राहुल गांधी ने कहा कि सिद्धारमैया ने पार्टी के लिए बड़ा बलिदान दिया है और वे समर्पण की मिसाल हैं। उन्होंने इस कदम को अनुकरणीय बताते हुए पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा की सराहना की। वहीं, सिद्धारमैया ने पार्टी हाईकमान को साफ संदेश दिया है कि बिना सभी समुदायों को बराबर प्रतिनिधित्व दिए डिप्टी सीएम पद बनाने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और लिंगायत समुदायों को उचित हिस्सेदारी देने की शर्त रखी है। सिद्धारमैया का कहना है कि बिना सामाजिक न्याय के सरकार का गठन अधूरा होगा। इस बयान से कांग्रेस के अंदर वर्चस्व की लड़ाई और गहराने के संकेत मिल रहे हैं। पार्टी आलाकमान अब इन मांगों और सामाजिक समीकरणों को संतुलित करने की कोशिश में जुटा है। नई सरकार के गठन में देरी से कार्यकर्ताओं में अधीरता भी बढ़ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला कर्नाटक कांग्रेस के भविष्य को प्रभावित कर सकता है। सिद्धारमैया की इस शर्त से पार्टी के भीतर गुटबाजी और मजबूत हो सकती है। अब देखना यह होगा कि हाईकमान इस उलझन का हल निकाल पाता है या नहीं। फिलहाल, उपमुख्यमंत्री पद को लेकर तल्खी जारी है और पार्टी संकट की स्थिति में नजर आ रही है। यह मामला कांग्रेस की एकता और सरकार के स्थायित्व के लिए अहम मोड़ साबित हो सकता है।
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