रायपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी है, जो 17 प्रोफेसरों के हालिया ट्रांसफर से और अधिक गंभीर हो गई है। कॉलेज में कुल 417 स्वीकृत पदों में से 166 पहले से ही खाली पड़े हैं, जिसके कारण शैक्षणिक गुणवत्ता और पीजी सीटों पर सीधा असर पड़ रहा है। एक तरफ 21 डॉक्टरों को प्रोफेसर पद पर पदोन्नति दी गई, तो वहीं दूसरी तरफ उनमें से 17 को राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित कर दिया गया। पिछले वर्ष शिक्षकों की कमी के चलते सर्जरी विभाग में पीजी की दो सीटें कम करनी पड़ी थीं। पूरे छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में स्थिति दयनीय है, जहां करीब 51% पद खाली हैं। सुपरस्पेशलिटी अस्पतालों में भी डॉक्टरों की कमी 58% तक पहुंच गई है। पिछले ढाई वर्षों में 100 से अधिक डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं, जिसका मुख्य कारण नियमित भर्तियों का न होना है। बड़ी संख्या में डॉक्टर बेहतर अवसरों की तलाश में अन्य राज्यों का रुख कर रहे हैं। इस प्रशासनिक निर्णय से फॉरेंसिक, सर्जरी, मेडिसिन और गायनिक समेत कई महत्वपूर्ण विभाग प्रभावित हुए हैं। राज्य प्रशासन को मेडिकल शिक्षा और अस्पताल सेवाओं को सुचारू रखने के लिए तत्काल नियमित भर्ती की आवश्यकता है।
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