हरियाणा मानवाधिकार आयोग (HHRC) ने बहादुरगढ़ में बंधुआ मजदूरी के दौरान चारा काटने की मशीन से अपना बायां हाथ गंवाने वाले नाबालिग संतोष के मामले में एक बड़ा निर्णय सुनाया है। आयोग ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन करार देते हुए हरियाणा सरकार को पीड़ित को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की सिफारिश की है। यह राशि बच्चे को उच्च गुणवत्ता वाला कृत्रिम हाथ (Artificial Upper Limb) लगवाने और उसके भविष्य के पुनर्वास के लिए दी जाएगी। जांच में सामने आया कि आरोपी अनिल कुमार ने बच्चे को दो महीने तक बंधक बनाकर रखा था। इस मामले में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और किशोर न्याय अधिनियम के तहत अदालत में चालान पेश किया जा चुका है। आयोग ने इस केस की जांच करने वाले अधिकारियों की सराहना की है। साथ ही, आयोग ने हरियाणा के गृह विभाग और डीजीपी को मुआवजे के भुगतान और केस की प्रगति पर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है। यह फैसला बंधुआ मजदूरी जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ एक मजबूत संदेश देता है।
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