गुजरात के राजकोट में हाल ही में चलाए गए मेगा डिमोलिशन (तोड़फोड़) अभियान के दौरान हुए एक वित्तीय विवाद ने तूल पकड़ लिया है। इस अभियान के दौरान तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के चाय-नाश्ते व भोजन पर महज तीन दिनों में 46 लाख रुपये खर्च किए जाने का खुलासा हुआ है। इस भारी-भरकम बिल के सामने आते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्टैंडिंग कमेटी ने फिलहाल इस बिल के भुगतान पर रोक लगा दी है और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। विपक्ष (कांग्रेस) ने इसे जनता के टैक्स के पैसे की खुली बर्बादी और सरकारी धन का दुरुपयोग करार दिया है। कांग्रेस नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे भ्रष्टाचार का मामला बताया है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी इस ‘दावत’ की खबरें चर्चा का विषय बनी हुई हैं, जहां लोग सवाल उठा रहे हैं कि एक तोड़फोड़ अभियान के दौरान इतने बड़े पैमाने पर खान-पान का खर्च कैसे हुआ। फिलहाल, प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं और इस बात की पड़ताल की जा रही है कि क्या बिल में हेरफेर किया गया था या वास्तव में इतने बड़े स्तर पर संसाधनों का उपयोग हुआ था।
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