मुंबई में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के सम्मान में ‘गुरुवंदन’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस समारोह में महान बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया को पद्मश्री पंडित डी.के. डाटर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साथ ही, पंडित मिलिंद रायकर के संगीत योगदान को भी सराहा गया। समारोह की मुख्य विशेषता 50 वायलिन वादकों की संगीतमयी श्रद्धांजलि थी। इस विशाल वाद्य समूह ने पंडित चौरसिया के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए एक भव्य सिम्फनी पेश की। कार्यक्रम ने संगीत के माध्यम से बनने वाले गहरे रिश्तों को उजागर किया। चौरसिया ने अपने वक्तव्य में कहा कि संगीत ही उनका परम गुरु है। यह आयोजन पंडित चौरसिया के जीवन भर के कला समर्पण को सलाम करने जैसा था। संगीत प्रेमियों और कलाकारों ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताया।
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