रेटिंग एजेंसी मूडीज़ ने कहा है कि मिडिल ईस्ट में जारी संकट का असर भारतीय बैंकों पर पड़ सकता है। एजेंसी के अनुसार भारत की ऊर्जा आयात पर बड़ी निर्भरता इस जोखिम को बढ़ाती है। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे सकता है। बढ़ती तेल कीमतों से महंगाई और ब्याज दरों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इसका सीधा असर कर्ज लेने वालों की भुगतान क्षमता पर पड़ सकता है। मूडीज़ ने कहा कि इससे बैंकों के लोन की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा रहेगा। खासतौर पर उन क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है जो ऊर्जा लागत पर ज्यादा निर्भर हैं। हालांकि एजेंसी ने यह भी कहा कि भारतीय बैंकों की वित्तीय स्थिति फिलहाल मजबूत बनी हुई है। बैंकों के पास संभावित नुकसान से निपटने के लिए पर्याप्त पूंजी और प्रावधान मौजूद हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय बैंकिंग सेक्टर की बैलेंस शीट में सुधार देखा गया है। फिर भी वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव को लेकर सतर्क रहने की जरूरत बताई गई है। मिडिल ईस्ट संकट के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल कीमतों में तेजी भारत की आर्थिक वृद्धि पर भी असर डाल सकती है। मूडीज़ ने कहा कि हालात लंबे समय तक बने रहने पर जोखिम और बढ़ सकते हैं।
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