महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ‘ऑपरेशन टाइगर’ और ‘ऑपरेशन वुल्फ’ की चर्चा तेज हो गई है। यह मुकाबला मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बीच राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई का प्रतीक बन गया है। हालिया घटनाक्रमों में एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे को पछाड़ते हुए अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत कर ली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन ऑपरेशंस के जरिए दोनों गुट एक-दूसरे के प्रभाव को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। शिंदे गुट ने रणनीतिक रूप से ठाकरे की घेराबंदी कर उन्हें बैकफुट पर धकेल दिया है। इस लड़ाई में संगठनात्मक मजबूती और समर्थकों को जोड़े रखने की होड़ लगी हुई है। उद्धव ठाकरे के लिए यह दौर काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है, क्योंकि उनके कई पुराने साथी शिंदे गुट के साथ मजबूती से खड़े हैं। महाराष्ट्र के बदलते राजनीतिक समीकरणों में एकनाथ शिंदे का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। यह पूरा मामला केवल सत्ता का नहीं, बल्कि बालासाहेब ठाकरे की विरासत पर दावेदारी का भी है। दोनों पक्षों की इस खींचतान ने राज्य की राजनीति में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।
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