पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर हुई बड़ी टूट के बाद अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बंगाल के बाद अब देश की राजधानी दिल्ली में भी पार्टी के भीतर कोई बड़ा ‘खेला’ हो सकता है। टीएमसी के राष्ट्रीय सांसदों के बीच आंतरिक असंतोष और बगावत की गंभीर आशंकाएं लगातार जताई जा रही हैं। पार्टी के ही कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि जो संकट राज्य विधानसभा में आया था, वह अब केंद्रीय स्तर पर भी दस्तक दे रहा है। यदि यह आंतरिक कलह नहीं थमी, तो विधानसभा जैसी बड़ी टूट का संकट लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों तक भी पहुंच सकता है। इस संभावित बगावत की आहट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके रणनीतिकारों की रातों की नींद उड़ा दी है। दिल्ली में मौजूद पार्टी के कुछ सांसदों के रुख और उनकी हालिया गतिविधियों को बेहद संदिग्ध माना जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि विरोधी राजनीतिक दल टीएमसी के असंतुष्ट सांसदों को अपने पाले में लाने के लिए लगातार संपर्क में हैं। संसद के आगामी सत्र से ठीक पहले इस तरह की खबरें आना तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित हो सकता है। ममता बनर्जी अब इस संभावित राजनीतिक संकट से निपटने और अपने सांसदों को एकजुट रखने के लिए गुप्त बैठकें कर रही हैं। पार्टी के भीतर के इस बड़े तनाव ने पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक की राजनीतिक हलचल को पूरी तरह तेज कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सांसदों में टूट होती है, तो केंद्र की राजनीति में टीएमसी का प्रभाव काफी कमजोर हो जाएगा। फिलहाल, पार्टी के शीर्ष नेता सभी सांसदों की गतिविधियों और उनके बयानों पर बहुत ही बारीकी से पैनी नजर रख रहे हैं।
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