छत्तीसगढ़ में खरीफ के नए कृषि सीजन की शुरुआत होते ही किसानों के बीच खेती-किसानी की हलचल काफी तेज हो गई है। मानसून के आगमन के साथ ही बाजार में यूरिया और अन्य जरूरी रासायनिक उर्वरकों की मांग में भारी उछाल आया है। इस मांग का फायदा उठाकर अवैध मुनाफा कमाने वाले खाद माफिया भी ग्रामीण इलाकों में सक्रिय होने लगे हैं। किसानों को सही समय पर और उचित दाम में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार अलर्ट हो गई है। राज्य सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए खाद माफियाओं के खिलाफ अब कड़ा मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर कृषि विभाग और जिला प्रशासन ने मिलकर विशेष संयुक्त टीमों का गठन किया है। इन सरकारी टीमों ने पूरे प्रदेश के संदिग्ध ठिकानों और गोदामों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी है। इस औचक कार्रवाई के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों से हजारों बोरी अवैध और जमा की गई उर्वरक जब्त की गई है। प्रशासन की इस अचानक और सख्त कार्रवाई से अवैध खाद का कारोबार करने वालों में हड़कंप मच गया है। सरकार ने चेतावनी दी है कि खाद की कालाबाजारी या कृत्रिम किल्लत पैदा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारी लगातार खाद विक्रेताओं के स्टॉक रजिस्टर और निर्धारित कीमतों की कड़ाई से जांच कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों ने सरकार के इस कदम की सराहना की है क्योंकि इससे उन्हें समय पर खाद मिल सकेगी। प्रशासन ने जिला स्तर पर कंट्रोल रूम भी बनाए हैं ताकि किसान कालाबाजारी की शिकायत तुरंत दर्ज करा सकें। आने वाले दिनों में जमाखोरों के खिलाफ और भी सख्त कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई होने की पूरी संभावना है।
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