भारत के मुख्य न्यायाधीश ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में संपत्ति की बरामदगी की सीमित दर पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हर 100 रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग में से अधिकारियों द्वारा केवल करीब 1 रुपया ही बरामद किया जा पाता है। यह स्थिति अवैध धन की जांच और जब्ती की चुनौती को दर्शाती है। मुख्य न्यायाधीश ने वित्तीय अपराधों से निपटने की प्रभावशीलता पर ध्यान देने की जरूरत बताई। मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए अपराध से अर्जित धन को छिपाने और वैध दिखाने की कोशिश की जाती है। ऐसे मामलों में धन का पता लगाना और उसे वापस हासिल करना जांच एजेंसियों के लिए कठिन होता है। सीमित रिकवरी से अवैध धन की रोकथाम और अपराधियों पर आर्थिक कार्रवाई की चुनौती सामने आती है। प्रभावी जांच के लिए वित्तीय लेनदेन की बेहतर निगरानी जरूरी है। संपत्ति की समय पर पहचान और जब्ती से रिकवरी बढ़ाई जा सकती है। वित्तीय अपराधों की जांच में संस्थागत क्षमता मजबूत करना भी महत्वपूर्ण है। मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में रिकवरी की गंभीर स्थिति को रेखांकित किया। उन्होंने अवैध धन की बरामदगी को प्रभावी न्याय व्यवस्था का अहम हिस्सा बताया।
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