मनरेगा में कथित 1.69 करोड़ रुपये की अनियमितता के मामले में ईओडब्ल्यू ने करीब 20 साल बाद चार्जशीट दाखिल की है। मामले में कांकेर के तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ केपी देवांगन समेत आठ अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। आरोपियों में जिले की सात जनपद पंचायतों के तत्कालीन सीईओ भी शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार अधिकारियों ने निजी फर्मों के साथ मिलीभगत कर बिना खुली निविदा के सामग्री खरीदी। फ्लेक्सी बोर्ड, मस्टर रोल, रजिस्टर, स्टेशनरी, टेंट और मेडिकल किट की खरीद में अनियमितता का आरोप है। कई सामानों की खरीद तय दर से कई गुना अधिक कीमत पर करने की बात सामने आई है। जांच में कुछ कार्यालयों में सामान पहुंचाए बिना ही बिल भुगतान किए जाने का भी खुलासा हुआ है। निविदा प्रक्रिया से बचने के लिए खरीद को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटने का आरोप है। ईओडब्ल्यू ने जिला पंचायत कांकेर समेत कई जनपद पंचायतों में वित्तीय गड़बड़ी पाई है। मामले की जांच वर्ष 2006 में शुरू हुई थी, लेकिन लंबे समय तक लंबित रही। अब नए सिरे से जांच के बाद आरोप पत्र पेश किया गया है। एजेंसी आरोपियों की संपत्ति और अन्य संभावित पहलुओं की भी जांच कर रही है।
Source: Source