मद्रास हाईकोर्ट ने धर्म परिवर्तन और आरक्षण को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए तमिलनाडु सरकार के 9 मार्च 2024 के उस सरकारी आदेश (GO) को असंवैधानिक करार देकर रद्द कर दिया है, जिसके तहत हिंदू धर्म की पिछड़ी, अति-पिछड़ी या अनुसूचित जाति से इस्लाम अपनाने वाले लोगों को ‘बैकवर्ड क्लास मुस्लिम’ (BCM) का दर्जा और आरक्षण देने की अनुमति दी गई थी। जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस पी.बी. बालाजी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस्लाम अपनाने के बाद व्यक्ति केवल ‘एक मुस्लिम’ रह जाता है; वह किसी विशिष्ट मुस्लिम समुदाय या जाति का सदस्य होने का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि ये समुदाय जन्म-आधारित होते हैं और धर्मांतरण से प्राप्त नहीं किए जा सकते। कोर्ट ने 1951 के अपने पुराने फैसले ‘जी. माइकल बनाम एस. वेंकटेश्वरन’ का हवाला देते हुए कहा कि कार्यकारी आदेशों के जरिए न्यायिक मिसालों को दरकिनार नहीं किया जा सकता। यह फैसला थूथुकुडी के समीर अहमद (पूर्व नाम परमशिवम) की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिन्होंने इस्लाम अपनाने के बाद ‘मुस्लिम लेब्बाई’ जाति प्रमाण पत्र की मांग की थी।
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