इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच संघर्ष का दायरा और बढ़ता नजर आ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार इजरायली नौसेना ने भी सैन्य अभियान में सक्रिय भूमिका निभाते हुए भूमध्य सागर से मिसाइल हमले किए हैं। इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति को और गंभीर बना दिया है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल की समुद्री क्षमताएं उसकी रणनीतिक ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। विशेष रूप से उसकी उन्नत पनडुब्बियां क्षेत्र में प्रभावशाली मानी जाती हैं। दूसरी ओर ईरान के पास बड़ी संख्या में छोटे और तेज नौसैनिक प्लेटफॉर्म का व्यापक नेटवर्क मौजूद है। इसे अक्सर उसकी ‘मच्छर सेना’ रणनीति के रूप में देखा जाता है। दोनों देशों की नौसैनिक क्षमताएं अलग-अलग सैन्य सिद्धांतों पर आधारित हैं। हालिया घटनाओं ने समुद्री मोर्चे को भी संघर्ष का प्रमुख केंद्र बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा सकती हैं। कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद तनाव कम होने के संकेत फिलहाल सीमित दिखाई दे रहे हैं।
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