भारत और यूनाइटेड किंगडम 15 जुलाई को व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। इसके माध्यम से दोनों देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और जनसंपर्क संबंधों को नई मजबूती मिलेगी। समझौता व्यवसायों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा। साथ ही पेशेवरों, छात्रों और अन्य लोगों की आवाजाही को भी बढ़ावा मिलेगा। मिस्री ने गतिशीलता को इस समझौते के प्रमुख लाभों में से एक बताया। दोनों देशों का लक्ष्य द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 48 अरब पाउंड के स्तर से काफी आगे बढ़ाना है। यह समझौता निवेश और कारोबारी सहयोग को भी प्रोत्साहित करेगा। भारतीय और ब्रिटिश कंपनियों को नए बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है। व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। समझौता रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में योगदान दे सकता है। भारत और ब्रिटेन के बीच रणनीतिक साझेदारी को इससे नई दिशा मिलने की संभावना है।
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