भारत में गर्मियों के दौरान पड़ने वाली भीषण गर्मी अब गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार हीटवेव की अवधि और तीव्रता दोनों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। अत्यधिक तापमान हर वर्ष हजारों लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है और कई मौतों का कारण बनता है। लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहने से शरीर का तापमान नियंत्रण तंत्र प्रभावित हो सकता है। शुरुआत में थकान, अत्यधिक पसीना, चक्कर आना और मांसपेशियों में ऐंठन जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। स्थिति गंभीर होने पर हीट एक्सॉशन और हीटस्ट्रोक जैसी जानलेवा अवस्थाएं विकसित हो सकती हैं। हीटस्ट्रोक में शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है, जिससे अंगों को नुकसान हो सकता है। बुजुर्ग, छोटे बच्चे, पहले से बीमार लोग और खुले में काम करने वाले श्रमिक सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं। अत्यधिक गर्मी से हृदय, किडनी और तंत्रिका तंत्र पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ पर्याप्त पानी पीने और धूप में अनावश्यक रूप से बाहर जाने से बचने की सलाह देते हैं। दोपहर के समय भारी शारीरिक गतिविधियों को सीमित रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। बढ़ती हीटवेव का असर केवल स्वास्थ्य पर ही नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था और उत्पादकता पर भी पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता, समय पर सावधानी और प्रभावी नीतियां इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए आवश्यक हैं।
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