सुप्रीम कोर्ट ने भारत में ट्रॉमा केयर को एक संवैधानिक अधिकार के रूप में मान्यता दी है। अदालत ने देशभर में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े सुधार के निर्देश जारी किए हैं। यह फैसला गंभीर दुर्घटनाओं और आपात स्थितियों में जीवन रक्षक इलाज सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि हर नागरिक को समय पर ट्रॉमा केयर मिलना मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। आदेश में इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। अस्पतालों में ट्रॉमा यूनिट्स की क्षमता बढ़ाने की बात कही गई है। एम्बुलेंस सेवाओं को अधिक प्रभावी और तेज बनाने के निर्देश दिए गए हैं। राज्यों और केंद्र सरकार को मिलकर एकीकृत प्रणाली विकसित करने को कहा गया है। अदालत ने कहा कि देरी के कारण होने वाली मौतों को रोका जाना जरूरी है। इस फैसले से देश की स्वास्थ्य आपातकालीन व्यवस्था में व्यापक बदलाव की उम्मीद है।
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