भारत के प्रतिस्पर्धी स्मार्टफोन बाजार में चीनी ब्रांडों की हिस्सेदारी में गिरावट देखने को मिल रही है। लंबे समय तक इन कंपनियों ने किफायती कीमत पर बेहतर स्पेसिफिकेशन की रणनीति से बाजार में मजबूत पकड़ बनाई थी। अब कंपोनेंट की बढ़ती लागत ने खास तौर पर बजट स्मार्टफोन सेगमेंट पर दबाव बढ़ाया है। महंगे कंपोनेंट के कारण कंपनियों के लिए कम कीमत में आकर्षक फीचर देना मुश्किल हो रहा है। भारतीय उपभोक्ताओं की प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं। ग्राहक अब केवल ज्यादा स्पेसिफिकेशन के बजाय पूरे उत्पाद की वैल्यू पर ध्यान दे रहे हैं। Samsung और Apple ने मजबूत ब्रांड लॉयल्टी विकसित की है। दोनों कंपनियों के व्यापक डिवाइस और सर्विस इकोसिस्टम भी ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। इससे चीनी स्मार्टफोन निर्माताओं के लिए बाजार में पुरानी बढ़त बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। एक दशक से अधिक समय तक सफल रही उनकी पारंपरिक रणनीति अब पहले जैसी प्रभावी नहीं दिख रही है। बाजार में दोबारा मजबूत स्थिति हासिल करने के लिए इन कंपनियों को नई रणनीति अपनानी होगी। नवाचार, बेहतर उत्पाद अनुभव और अलग पहचान बनाने पर जोर देना जरूरी होगा। बदलते बाजार में उपभोक्ताओं की नई अपेक्षाओं के अनुरूप खुद को ढालना चीनी ब्रांडों के लिए अहम होगा।
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