भारत की प्रजनन दर प्रतिस्थापन स्तर से नीचे पहुंचने के बाद देश की आर्थिक दिशा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। इस मुद्दे पर एडलवाइस म्यूचुअल फंड की सीईओ राधिका गुप्ता ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उनका कहना है कि अब केवल जनसंख्या का आकार नहीं, बल्कि कार्यबल की गुणवत्ता और उत्पादकता अधिक महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि कम जन्मदर की स्थिति में आर्थिक विकास के लिए कुशल मानव संसाधन की भूमिका बढ़ जाएगी। राधिका गुप्ता के अनुसार श्रमिकों की उत्पादकता और कौशल विकास भविष्य की वृद्धि के प्रमुख आधार बनेंगे। उन्होंने महिला श्रम भागीदारी को भी आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण कारक बताया। उनका मानना है कि महिलाओं को करियर और परिवार के बीच संतुलन बनाने में बेहतर सहयोग मिलना चाहिए। इसके लिए मजबूत चाइल्डकेयर और देखभाल संबंधी बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि यह चुनौती पारंपरिक आर्थिक विकास के मुद्दों जितनी ही महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जनसांख्यिकीय संरचना का असर श्रम बाजार और आर्थिक नीतियों पर पड़ेगा। ऐसे में शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक समर्थन प्रणालियों को मजबूत करना जरूरी होगा। घटती जन्मदर के दौर में मानव पूंजी का प्रभावी उपयोग ही दीर्घकालिक आर्थिक विकास की कुंजी माना जा रहा है।
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