भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने के लिए एक नई रणनीतिक दिशा की ओर बढ़ रहा है। अब केवल तेल के भौतिक भंडारण पर निर्भर रहने के बजाय, देश रणनीतिक मूल्य आरक्षित (SPR) प्रणाली को अपनाने पर विचार कर रहा है। वर्तमान में, भारत के पास सीमित भंडारण क्षमता है और इसे जमीनी स्तर पर 17 दिनों से बढ़ाकर 45 दिनों तक ले जाने की आवश्यकता है। इसके अलावा, समुद्र में टैंकरों के जरिए अतिरिक्त 10 से 15 दिनों का SPR रखने का विकल्प भी तलाशा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का सुझाव है कि प्रत्येक देश के पास कम से कम 90 दिनों का आपातकालीन तेल भंडार होना चाहिए। भारत इस वैश्विक मानक को प्राप्त करने की दिशा में धीरे-धीरे कदम उठा रहा है। ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए यह नई रणनीति काफी प्रभावी हो सकती है। सरकार का मुख्य ध्यान आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने और वैश्विक संकटों के समय तेल की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर है। यह पहल न केवल आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी है, बल्कि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भी एक दूरदर्शी कदम है।
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