राजस्थान के भरतपुर में पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना हत्याकांड को लेकर एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच में पता चला है कि पूर्व विधायक को अपनी हत्या की गहरी आशंका थी, जिसके चलते उन्होंने कुछ दिन पहले ही अपनी सुरक्षा के लिए 30 सिक्योरिटी गार्ड तैनात किए थे। गत 11 अक्टूबर की शाम को जब हमलावरों ने क्रेशर पर हमला बोला, तो ये सभी सुरक्षा गार्ड मौके से डरकर भाग खड़े हुए। ग्रामीणों का यह भी दावा है कि इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने से पहले गांव में एक गुप्त बैठक बुलाई गई थी, जिसमें करीब 20 लोग शामिल थे और हमलावरों ने कहा था कि अब उनका काल आ गया है। इस बीच पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस मामले में 5 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्होंने पूछताछ के दौरान 35 से 40 अन्य लोगों के नाम उगले हैं। घटना के समय पूर्व विधायक की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में 64 लोगों को नामजद किया गया है। दूसरी ओर, पुलिस अधीक्षक राजेश मीणा का कहना है कि पूर्व विधायक ने लीज पर जाने से पहले स्थानीय पुलिस को कोई पूर्व सूचना नहीं दी थी। इस गंभीर लापरवाही और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की उच्च स्तरीय बैठक के बाद बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया गया है। सरकार ने वैर थानाधिकारी धीरेंद्र सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि एएसपी प्रेरणा शेखावत और भुसावर सीओ नीरज भारद्वाज को एपीओ (पदस्थापन की प्रतीक्षा में) कर दिया गया है। पुलिस इस मामले में सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर खंगाल रही है ताकि फायरिंग और पूरी वारदात की असल सच्चाई सामने आ सके।
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