वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान बैंक क्रेडिट ग्रोथ ने रफ्तार पकड़ ली है। 31 मई 2026 को समाप्त हुए पखवाड़े में ऋण वृद्धि 17.7% दर्ज की गई है, जो इस वित्तीय वर्ष का अब तक का उच्चतम स्तर है। जून 2024 के बाद यह साल-दर-साल आधार पर सबसे मजबूत विस्तार है। 31 मार्च 2026 से अब तक बकाया बैंक ऋण में 1.5 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिससे कुल क्रेडिट का आंकड़ा 215.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि क्रेडिट की इस मांग के पीछे मुख्य रूप से तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की बढ़ती जरूरतें हैं, जिन्हें कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण कम प्राप्ति का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, सरकार की आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) ने भी ऋण उठाव को प्रोत्साहित किया है। हालांकि, डिपॉजिट ग्रोथ में तुलनात्मक सुस्ती के कारण बैंकों के समक्ष फंडिंग गैप की चुनौती बढ़ती जा रही है। बढ़ते ऋण और सीमित डिपॉजिट के बीच बैंक अब तरलता प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने के कारण आने वाले समय में भी ऋण की मांग बने रहने की संभावना है। बैंकों को अपने संसाधनों को जुटाने के लिए डिपॉजिट आकर्षित करने के लिए दरों में बदलाव करना पड़ सकता है।
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