बेमेतरा जिले में रेत खनन पर प्रतिबंध को लेकर जिला प्रशासन विवादों में घिर गया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार मानसून के दौरान 10 जून से नदियों में रेत खनन पर पूर्ण रोक लागू हो चुकी थी। इसके बावजूद जिला प्रशासन ने इस संबंध में सार्वजनिक आदेश 22 जून को जारी किया। आदेश जारी करने में हुई 12 दिनों की देरी अब चर्चा और सवालों का विषय बन गई है। स्थानीय लोगों और संबंधित पक्षों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रतिबंध की जानकारी समय पर सार्वजनिक की जानी चाहिए थी। देरी के कारण नियमों के पालन और निगरानी को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और त्वरित सूचना बेहद महत्वपूर्ण होती है। मानसून के दौरान रेत खनन पर रोक का उद्देश्य नदियों के पारिस्थितिक संतुलन और पर्यावरण की रक्षा करना है। प्रशासन की ओर से देरी के कारणों पर अभी तक स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। मामले को लेकर जिले में विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है और जवाबदेही की मांग उठ रही है।
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