छत्तीसगढ़ के बेमेतरा कृषि महाविद्यालय में अलसी के डंठल से लिनेन बनाने की इकाई स्थापित की गई है। इस इकाई की स्थापना इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर और आईसीएआर, हैदराबाद के संयुक्त प्रयासों से हुई है। पहले अलसी के डंठल को कृषि अपशिष्ट माना जाता था, लेकिन अब इसका उपयोग उपयोगी उत्पाद बनाने में किया जाएगा। वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने इस वेस्ट टू वेल्थ मॉडल का अवलोकन किया। इस पहल का उद्देश्य कृषि अवशेषों का बेहतर उपयोग करना है। इससे किसानों को फसल के अवशेषों से अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिल सकता है। साथ ही, महिला स्व सहायता समूहों को स्थानीय स्तर पर रोजगार से जोड़ने में मदद मिलेगी। यह पहल कृषि अपशिष्ट को आर्थिक संसाधन में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावना है।
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