बेंगलुरु में किए गए एक नए शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से सर्वाइकल कैंसर के जोखिम का शुरुआती चरण में पता लगाने पर काम किया जा रहा है। इस तकनीक का उद्देश्य कैंसर होने के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले होने वाले पूर्व-कैंसर (प्रीकैंसरस) बदलावों की पहचान करना है। शोधकर्ता ने इस तकनीक से संबंधित पेटेंट भी हासिल किया है। अध्ययन का लक्ष्य महिलाओं में समय रहते जोखिम की पहचान कर उपचार की संभावना बढ़ाना है। एआई आधारित प्रणाली कोशिकाओं में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों का विश्लेषण कर सकती है। इससे बीमारी के गंभीर रूप लेने से पहले चिकित्सकीय हस्तक्षेप संभव हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती पहचान से सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मृत्यु दर कम करने में मदद मिल सकती है। यह तकनीक भविष्य में स्क्रीनिंग प्रक्रिया को अधिक सटीक और प्रभावी बना सकती है। हालांकि इस प्रणाली के व्यापक उपयोग से पहले और अधिक परीक्षण तथा चिकित्सकीय सत्यापन की आवश्यकता होगी। शोधकर्ताओं का कहना है कि इसका उद्देश्य पारंपरिक जांच विधियों को बेहतर बनाना है, उनका स्थान लेना नहीं। सफल होने पर यह तकनीक महिलाओं के स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।
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