राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने डाइंग यूनिट पर लगाए गए ₹10 लाख के जुर्माने को बरकरार रखा है। यूनिट पर बिना उपचारित अपशिष्ट जल को छोड़ने का आरोप था। अधिकरण ने पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया। मामले में औद्योगिक इकाई द्वारा प्रदूषित अपशिष्ट के निपटान से जुड़ी लापरवाही सामने आई। NGT ने पर्यावरण को होने वाले नुकसान को ध्यान में रखते हुए जुर्माने को उचित माना। आदेश में प्रदूषण नियंत्रण मानकों के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया गया। औद्योगिक इकाइयों को अपशिष्ट जल का उचित उपचार करने की जिम्मेदारी होती है। बिना उपचारित effluent का निस्तारण जल स्रोतों और पर्यावरण के लिए नुकसानदेह हो सकता है। NGT का यह फैसला पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन का संदेश देता है। संबंधित डाइंग यूनिट को निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन करना होगा। जुर्माने को बरकरार रखने से प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था के सख्त रुख का संकेत मिलता है। यह मामला औद्योगिक प्रदूषण के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई की अहमियत भी रेखांकित करता है।
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