छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में वृद्धि की घोषणा के बावजूद बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है। राज्य में लगभग 51 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें से करीब 41 लाख पर बढ़ी हुई दरों का प्रभाव सीमित रहने की बात कही जा रही है। इसका मुख्य कारण राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी और सब्सिडी आधारित योजनाएं हैं। बीपीएल परिवारों को उपलब्ध कराई जा रही निश्शुल्क बिजली सुविधा से उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना नहीं करना पड़ेगा। वहीं अन्य पात्र घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली बिल पर 50 प्रतिशत तक की रियायत मिलती रहेगी। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं से आम उपभोक्ताओं को पर्याप्त राहत मिलेगी। बिजली दरों में संशोधन के बावजूद अधिकांश परिवारों के मासिक खर्च में बड़ा बदलाव नहीं आने की उम्मीद है। किसानों के लिए दी जा रही बिजली सब्सिडी भी जारी रखी जाएगी। इससे कृषि क्षेत्र पर बढ़ी हुई दरों का असर कम करने का प्रयास किया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्र, विशेष रूप से स्टील उद्योग को भी पूर्ववत रियायतें मिलने की जानकारी दी गई है। सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं और उद्योगों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र की वित्तीय आवश्यकताओं और जनहित दोनों को ध्यान में रखकर निर्णय लिए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सब्सिडी योजनाएं उपभोक्ताओं को तत्काल राहत प्रदान करेंगी। आने वाले समय में बिजली खपत और सरकारी सहायता योजनाओं की प्रभावशीलता पर नजर बनी रहेगी।
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