छत्तीसगढ़ के बालोद में प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ के आह्वान पर मितानिनों, मितानिन प्रशिक्षकों, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटरों और ब्लॉक कोऑर्डिनेटरों ने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन बस स्टैंड बालोद में आयोजित हुआ। बड़ी संख्या में जुटी कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों को जल्द पूरा करने की मांग की। मितानिनों का कहना है कि वर्ष 2023 के चुनावी वादे में मानदेय वृद्धि और एनएचएम में संविलियन का आश्वासन दिया गया था। लेकिन सरकार बनने के बाद अब तक इन पर अमल नहीं हुआ है। इससे प्रदेशभर की मितानिन कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने मितानिन कार्यक्रम को निजी संस्था (एनजीओ) के माध्यम से संचालित करने का विरोध किया। उनका कहना है कि इससे उनके रोजगार और भविष्य पर खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने मांग की कि कार्यक्रम को सीधे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत शामिल किया जाए। कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया। कई प्रतिनिधियों ने कहा कि लगभग 24 वर्षों से मितानिनें लगातार सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने सरकार से जल्द ठोस निर्णय लेने की अपील की।
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