छत्तीसगढ़ के खरीदी केंद्रों में धान खरीदी खत्म हुए चार महीने बीत चुके हैं। अब भी 10.76 लाख क्विंटल से अधिक धान असुरक्षित पड़ा हुआ है। मानसून करीब है, बारिश होने पर यह धान खराब हो सकता है। इस धान का कुल मूल्य 333.74 करोड़ रुपए से अधिक है। खरीदी केंद्रों में मोटा, पतला और सरना धान का परिवहन बाकी है। 31 मई की समय सीमा बीतने के बाद भी बड़ी मात्रा में धान नहीं उठाया गया। राजनांदगांव जिले की 79 समितियों में 56 हजार क्विंटल धान (17 करोड़ रुपए) पड़ा है। बस्तर संभाग के करीब 200 केंद्रों में 4.56 लाख क्विंटल धान (141 करोड़ रुपए) खुले में है। मिलर्स को धान उठाने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन वे लापरवाही कर रहे हैं। मिलर्स का कहना है कि गोदामों में जगह कमी और गाड़ियों की कमी से उठाव नहीं हो पाया। बस्तर में लंबी दूरी के लिए ट्रक मिलना मुश्किल हो रहा है। राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने 15 जून तक सारा धान उठाने का दावा किया है। लेकिन संग्रहण केंद्रों में लोडिंग क्षमता कम होने से भी परेशानी आ रही है। पिछले साल 14.10 करोड़ क्विंटल धान खरीदा गया था, जिसमें से अधिकांश मिलर्स को दिया गया। बारिश से पहले धान खराब होने का गंभीर खतरा बना हुआ है।
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