छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बलौदाबाजार हिंसा मामले में तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह मामला 10 जून 2024 को हुई भीषण हिंसा से जुड़ा है। जस्टिस एनके व्यास ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आरोपियों ने 7-8 हजार लोगों की भीड़ को भड़काया। इस दौरान करीब 13 से 14 करोड़ रुपये की सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला किया गया, जो गंभीर अपराध है। इस मामले में छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के संस्थापक अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश वर्मा शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में जमानत देना न्याय और कानून व्यवस्था के हित में नहीं होगा। आरोपियों का पूर्व आपराधिक इतिहास भी है, जिसे कोर्ट ने नोट किया। अब तीनों जेल में रहेंगे और उन्हें अपना बचाव करना होगा। यह फैसला दंगाइयों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के लिए कड़ा संदेश है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भीड़ को भड़काने वालों को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। यह मामला समाज में शांति और कानून व्यवस्था को बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रतीक है।
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